Chhand Chhatrang

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शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

बाल कविता ~ मड़ई

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मड़ई गाँव-गाँव मा होथे मड़ई। महिमा आगर, बहुते बड़ई।। देव साँहड़ा के हे मातर। सब सकलाथें भाँठा चातर।। खेती के जब बुता थिराथे। मातर मड़ई तभे ...
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