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शनिवार, 29 अप्रैल 2023
बाल गीत - पटपट पटपट पिटिर पटिर
सोमवार, 20 मार्च 2023
सोमवार, 14 नवंबर 2022
छतीसगढ़ चालीसा ~ कन्हैया साहू 'अमित'
छत्तीसगढ़ चालीसा
दोहा:-
दाई के अँचरा भरे, ममता मया खदान।
जय छतीसगढ़ नित कहत, करय अमित गुणगान।।
चौपाई:-
जय जय छतीसगढ़ महतारी। महिमा तोरे हावय भारी।।-1
एक नवंबर दिन हे पावन। रंग-रूप हे तोर सुहावन।।-2
एक हाथ मा हँसिया, बाली। दुसर हाथ बाँटत खुशहाली।।-3
सरी अंग मा गहना साजे। दुनिया भर मा डंका बाजे।।-4
कोरवान हे लुगरा हरियर। माथ मउर मन मोहय सुग्घर।।-5
तोरे मुखड़ा मन ला भावय। तोर सहीं कोनो नइ हावय।।-6
करनफूल अउ ककनी, करधन। सूँता, रुपिया पहिरे बनठन।।-7
चुटकी, पैरी, बिछिया, लच्छा। माहुर, टिकली बहुते अच्छा।।-8
ओली तोरे अन, ओन्हारी। भरपुरहा भाजी तरकारी।।-9
खानपान के भरे भंडारा। चटनी-बासी अगम अपारा।।-10
गुरहाचीला,भजिया, हलुआ।
अरसा, पपची, पिड़िया, पकुआ।।-11
लाड़ू, सोंहारी, अंगाकर। रोटी-पीठा इँहचे मनभर।।-12
रिता कभू नइ राहय कोरा। सिरतों सिगसिग धान कटोरा।।-13
गुरमटिया, सफरी सुखसागर। पलटू, लुचई, रानीकाजर।।-14
हाही-माही धनहा, परिया। कुआँ-बावली, नँदिया, तरिया।।-15
माटी बड़ कन्हार, मटासी। खेती कारज, भरय हुलासी।।-16
इंद्रावती, ईब, मनियारी। महानदी, अरपा के धारी।।-17
लीलागर, शिवनाथ, जमुनिया। लहर-लहर लहराय दुगुनिया।।-18
गंगरेल जस लागय गंगा। हसदो, खुड़िया लहर तुरंगा।।-19
पुटका, बंकी अउ किंकारी। कोड़ार, मोंगरा मुखतारी।।-20
ईसर राजा, ठाकुर देवा। ठउर-ठउर महमाया सेवा।।-21
जयति शीतला, जय बगदाई। मेड़ोपार चुरैलिन माई।।-22
सिरपुर, राजिम अउ डोंगरगढ़। भोरमदेव, रतनपुर बढ़-चढ़।।-23
दंतेवाड़ा, शिवरीनारायण। धर्म धाम हे छाहित कण-कण।।-24
जय गिरौध, जय दामाखेड़ा। चारोंकोती सत के बेड़ा।।-25
खैर, चार, तेंदू अउ मँउहा। जिनिस इहाँ सब झँउहा-झँउहा।।-26
तिज तिहार हे कोरी-कोरी। राखी, देवारी अउ होरी।।-27
इहाँ हरेली, जोत जवाँरा। पोरा-तीजा प्राण अधारा।।-28
सुआ, ददरिया, पंथी, करमा। गाँवय-नाँचय सब घर-घर मा।।-29
सैला, सरहुल अउ डंडारी। इँखर हवय अलगे चिन्हारी।।-30
गोंड़, कोरकू, हल्बा, सौंरा। तोर चरण इँखरो घर, चौंरा।।-31
कोल, कँवर, धनवार, अगरिया। रहँय-बसँय इन सब मनफरिया।।-32
कोठा, कोठी, कोठार-बियारा। सरी कुसाली तोर सहारा।।-33
घर, अँगना अउ बखरी-बारी। तोर कृपा ले महल, अटारी।।-34
टिन, बाक्साइट, डोलोमाइट। हीरा, सोना अउ ग्रेफाइट।।-35
छुही, कोयला, चूना, पखरा। छपछप ले छतीसगढ़ अँचरा।।-36
मोर कलम थक जाथे दाई। लिखत-लिखत मा तोर बड़ाई।।-37
जिनगी भर देबे आसीसा। लिखे हवँव तोरे चालीसा।।-38
अमित सरग नइ चाही चोखा। इहें जनम के माढ़य जोखा।।-39
करबे सुख-दुख सरी सरेखा। मोर भाग मा लिख ये लेखा।।-40
दोहा:-
माटी चंदन हे इहाँ, माथा तिलक लगाँव।
विनती अतके हे अमित, जनम इहें मैं पाँव।।
कन्हैया साहू 'अमित'✍️ भाटापारा छत्तीसगढ़
गोठबात 9200252055
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रविवार, 8 मई 2022
आल्हा चालीसा
आल्हा चालीसा (आल्हा छंद)
(कन्हैया साहू 'अमित')
सुमरनि:-(दोहा)
1~हाँथ जोड़ बिनती करँव, काटव अमित कलेस।
जय गनपति जय गजबदन, गिरिजापूत गनेस।
2~ गिरिजापूत गनेस जी, राख सभा मा लाज।
सबद बता माँ सारदा, बानी बइठ बिराज।
3~बानी बइठ बिराज लव, कूलदेव भगवान।
चलत रहय ये लेखनी, दव अइसन बरदान।
4~दव अइसन बरदान गुरु, सिखँव लिखँव सब छंद।
गुरु किरपा बड़ भाग ले, मिलय अमित आनन्द~5
सुमरनि:- (चौपाई)
1~सुमिरँव सदा ददा दाई ला,
अउ मोर माँवली माई ला।
सुमिरँव अरुण निगम श्री गुरुवर,
छंद ग्यान जे देइन सुग्घर।
2~परमपिता प्रभु पालनहारी,
जय हो ब्रम्हा बिस्नु तिपुरारी।
भूल चूक माँफी निपटारा,
किरपा करहू 'अमित' अपारा।
3~अँड़हा अदरा अमित अजारा,
रहिथँव मैं हा भाटापारा,
प्रभु चरनन मैं टेकँव माथा,
गुरु किरपा ये आल्हा गाथा।
*कथा प्रसंग*
हे गनेस तैं सबद बरन दे, सदा सहायक सारद माय।
हाँथ धरे हँव तुँहर लेखनी, अक्छर-अक्छर 'अमित' लिखाय।।~1
जोंड़ जाँड़ के आखर-आखर, लिखय 'अमित' अँड़हा मतिमंद।
गुरु किरपा के बरसे बरसा, तभे लिखत हँव आल्हा छंद।।~2
अब्बड़ अद्भुत अलखा आल्हा, अलहन अलकर टार मिटाय।
अटकर अजरा अलवा-जलवा, अड़हा जइसे अमित बताय।।~3
महाबीर बन जनमें आल्हा, बाहुबली ये 'अमित' कहाय।
जोश जवानी जउँहर जिनगी, सुन के कायर झट मर जाय।।~4
आल्हा ऊदल दू झन भाई, रहँय महोबा बीर महान।
गाँव-गाँव मा गाथैं गाथा, आल्हा ऊदल जस गुनगान।।~5
धरमराज अवतारी आल्हा, भीम सहीं ऊदल दमदार।
लड़ें लडा़ई बावन ठन जी, जिनगी भर नइ जानिन हार।।~6
कौरव पांड़व कुल हा जूझे, लड़गे कुरूक्षेत्र मैदान।
जनम धरें कलजुग मा दूनों, आल्हा ऊदल होंय महान।।~7
जस गुन गावँव इन जोद्धा के, हमरे बस के नइहे बात।
जेखर कीरति घर-घर बगरे, जस गाथा गावँय दिन रात।~8
******* *आल्हा के जनम* ********
जेठ महीना दसमी जनमे, आल्हा देवल पूत कहाय।
बन जसराज ददा गा सेउक, गढ़ चँदेल के हुकुम बजाय।।~9
ददा लड़त जब सरग सिधारे, आल्हा होगे एक अनाथ।
दाई देवल परे
अकेल्ला, राजा रानी देवँय साथ।।~10
तीन महीना पाछू जनमे, बाप जुद्ध में जान गवाँय।
बीर बड़े छुट भाई आल्हा, ऊधम ऊदल नाँव धराय।।~11
राजा परमल पोसय पालय, रानी मलिना राखय संग।
राजमहल मा खेंलँय खावँय, आल्हा ऊदल रहँय मतंग।।~12
सिक्छा-दीक्छा होवय सँघरा, लालन-पालन पूत समान।
बड़े बहादुर बलखर बनगे, लागँय राजा के संतान।।~13
बड़े लड़इया आल्हा ऊदल, जेंखर बल के पार न पाय।
रक्छक बन परमाल देव के, आल्हा ऊदल जान लड़ाय।।~14
आल्हा संगी सिधवा मितवा, नइहे चोला एको दाग।
थरथर कापँय कपटी खोड़िल, बैरी बर बड़ बिखहर नाग।।~15
बन चँदेल राजा के सेउक, अपन हँथेरी राखँय प्रान।
नित चँदेल हो चौगुन चाकर, दुनिया भर मा बाढ़य शान।।~16
'अमित' महोबा के बलवंता, आल्हा आगू कोन सजोर।
बाढ़त नदियाँ पूरा पानी, पुन्नी कस चन्दा अंजोर।।~17
झगरा माते बात-बात मा, मार काट अउ हाहाकार।
पोठ लहू के होरी होवय, पवन सहीं खड़कय तलवार।।~18
काँही तो नइ भावय इनला, रास रंग अउ तीज तिहार।
फड़फड़ फरकय भक्कम भुजबल, रहँय जुद्ध बर बीर तियार।।~19
सुते नींद नइ आवय दसना, बड़ बज्जर बलखर बलबीर।
लड़त-लड़त बीतय दिन रतिहा, दँय झट बैरी छाती चीर।।~20
राजपाट राजा रज रक्छक, आल्हा नइ तो चिटिक अबेर।
कुकुर कोलिहा सौ का करहीं, आल्हा ऊदल बब्बर शेर।।~21
सतरा बछर उमर मा होवय, आल्हा के शुभ लगन बिहाव।
नैनागढ़ नेपाली राजा, बेटी मछला संग हियाव।।~22
राजकुमारी मछला जानय, जादू के जब्बर जर ग्यान।
नाँव सोनवा मछला जानव, रहय एक नइ इँखर समान।।~23
बीर बहादुर बघवा बेटा, मछला आल्हा के संतान।
बाप कका कस बड़ बलवंता, इंदल बरवाना बलवान।।~24
******* *आल्हा के पराक्रम* ******
राग रागिनी नइ तो भावय, राजमहल अब नइच सुहाय।
बोल बचन सुन महतारी के, बेटा बाघ मार घर लाय।।~25
आज बाघ कल बैरी मारव, तब छतिया के दाह बुताय।
बिन अहेर के मैं नइ मानँव, दाई ताना इही सुनाय।।~26
जेखर बेटा कायर निकले, महतारी रो-रो पछताय।
सुनव दुनों तुम आल्हा ऊदल, असल पूत जे बचन निभाय।।~27
कुकुर बछर बारा बस जीयय, जीयय सोला साल सियार।
बरिस अठारा छत्री जीये, आगू के जिनगी बेकार।।~28
मूँड़ टँगागे बाप कका के, माँडूगढ़ बर रुख के डार।
अधरतिया के अध बेरा मा, मूँड़ी बड़ पारय गोहार।।~29
आवव आल्हा ऊदल आवव, मोर लड़ंका लठिया लाल।
बँच के आहू माँडूगढ़ मा, बन बघेल के जी के काल।।~30
खूब लड़इया लहुआ आल्हा, दूसर ले देवी बरदान।
भगत भवानी सारद माँ के, जइसे सीया के हनुमान।।~31
बइठ बछर बारा बन तपसी, मैहर माई के दरबार।
मूँड़ काट अरपन देवी ला, होय अमर आल्हा अवतार।।~32
आल्हा ऊदल चलथें अइसे, जइसे रामलखन चलि जाय।
भुजबल भारी भक्कम भइगे, आँखी भभका कस भमकाय।।~33
आल्हा ऊदल सिरतों सेउक, समझँय येला अपन सुभाग।
धरम करम हे राजपूत के, लड़त-लड़त दँय प्रान तियाग।।~34
धरम धजा कस उड़े पताका, नाँव धराये हे अलहान।
सूरुज बूड़य बुड़ती बेरा, नइ बूड़ै आल्हा के शान।।~35
जीत-जीत के जिनगी जीयँय, जउँहर जोद्धा जय जयकार।
जेखर बैरी जीयँत जागय, ओखर जिनगी हा बेकार।।~36
रन मा आल्हा करँय सवारी, पुष्यावत हाथी के नाँव।
खदबिद-खदबिद घोडा़ दउँड़े, कहाँ थोरको माढ़य पाँव।।~37
देशराज बर खाये किरिया, आल्हा जोरय जम्मों जात।
एकमई सब राहव काहय, भेदभाव के छोड़व बात।।~38
सबके हितवा आल्हा ऊदल, परहित मा ये भरँय हुँकार।
रक्छक बहिनी महतारी के, बैरी के दँय सरी उजार।।~39
आल्हा ऊदल बड़ बलिदानी, राज महोबा के बिसवास।
करनी अइसन करें तियागी, अमर नाँव लिखगें इतिहास।~40
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*कन्हैया साहू "अमित"*
शिक्षक ~भाटापारा (छ.ग)
संपर्क ~ 9200252055
©सृजन~ 21/05/2018®
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गुरुवार, 28 अप्रैल 2022
नवा जमाना - सार छंद
सार छंद - नवा जमाना
शिक्षा दीक्षा कहाँ गवाँगे, आगे नवा जमाना।
पाँव परय अब माड़ी के सब, छोड़य माथ नवाना।-1
हाथ जोड़ के मुँड़ी नवाई, कोन कोत नंदागे।
सेखी झारै देखमरी मा, हाय हलो ह हमागे।-2
सास बहू के सुमता जरगे, कहाँ पटै अब तारी।
पिता पूत के पैंती उसले, लइका देवय गारी।-3
लाज सरम हा मरगे अब तो, पहिरँय अलकर कपड़ा।
गिधवा मनखे देख निहारँय, दिन दिन बाढ़य लफड़ा।-4
फेसन कइसन हे अलकरहा, पाँच हाथ के लुगरा।
मुँहू कान ला तोपे ढ़ाँके, पीठ पेट हे उघरा।-5
चिरहा फटहा जींस कपाये, भुँइया तक ये लामे।
कनिहा खाल्हे कँसे बेल्ट हे, पता नहीं का थामे।।-6
चुंदी रंगे रिंगीचिंगी, अलकरहा कटवाथें।
टूरी-टूरा एक्के दिखथें, कोन कहाँ चिन्हाँथें।।-7
अपन हाथ मा हावय सिरतों, अपने सब मरजादा।
नवा जमाना संग चलव पर, राहव सुग्घर सादा।-8
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कन्हैया साहू 'अमित'- शिक्षक, भाटापारा छत्तीसगढ़
चंद्रयान अभिमान
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