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सोमवार, 14 नवंबर 2022

छतीसगढ़ चालीसा ~ कन्हैया साहू 'अमित'

छत्तीसगढ़ चालीसा

दोहा:-
दाई के अँचरा भरे, ममता मया खदान
जय छतीसगढ़ नित कहत, करय अमित गुणगान।।

चौपाई:-
जय जय छतीसगढ़ महतारी। महिमा तोरे हावय भारी।।-1
एक नवंबर दिन हे पावन। रंग-रूप हे तोर सुहावन।।-2

एक हाथ मा हँसिया, बाली। दुसर हाथ बाँटत खुशहाली।।-3
सरी अंग मा गहना साजे। दुनिया भर मा डंका बाजे।।-4

कोरवान हे लुगरा हरियर। माथ मउर मन मोहय सुग्घर।।-5
तोरे मुखड़ा मन ला भावय। तोर सहीं कोनो नइ हावय।।-6

करनफूल अउ ककनी, करधन। सूँता, रुपिया पहिरे बनठन।।-7
चुटकी, पैरी, बिछिया, लच्छा। माहुर, टिकली बहुते अच्छा।।-8

ओली तोरे अन, ओन्हारी।  भरपुरहा भाजी तरकारी।।-9
खानपान के भरे भंडारा। चटनी-बासी अगम अपारा।।-10

गुरहाचीला,भजिया, हलुआ।
अरसा, पपची, पिड़िया, पकुआ।।-11
लाड़ू, सोंहारी, अंगाकर। रोटी-पीठा इँहचे मनभर।।-12

रिता कभू नइ राहय कोरा। सिरतों सिगसिग धान कटोरा।।-13
गुरमटिया, सफरी सुखसागर। पलटू, लुचई, रानीकाजर।।-14

हाही-माही धनहा, परिया। कुआँ-बावली, नँदिया, तरिया।।-15
माटी बड़ कन्हार, मटासी। खेती कारज, भरय हुलासी।।-16

इंद्रावती, ईब, मनियारी। महानदी, अरपा के धारी।।-17
लीलागर, शिवनाथ, जमुनिया। लहर-लहर लहराय दुगुनिया।।-18

गंगरेल जस लागय गंगा। हसदो, खुड़िया लहर तुरंगा।।-19
पुटका, बंकी अउ किंकारी। कोड़ार, मोंगरा मुखतारी।।-20

ईसर राजा, ठाकुर देवा। ठउर-ठउर महमाया सेवा।।-21
जयति शीतला, जय बगदाई। मेड़ोपार चुरैलिन माई।।-22

सिरपुर, राजिम अउ डोंगरगढ़। भोरमदेव, रतनपुर बढ़-चढ़।।-23
दंतेवाड़ा, शिवरीनारायण। धर्म धाम हे छाहित कण-कण।।-24

जय गिरौध, जय दामाखेड़ा। चारोंकोती सत के बेड़ा।।-25
खैर, चार, तेंदू अउ मँउहा। जिनिस इहाँ सब झँउहा-झँउहा।।-26

तिज तिहार हे कोरी-कोरी। राखी, देवारी अउ होरी।।-27
इहाँ हरेली, जोत जवाँरा। पोरा-तीजा प्राण अधारा।।-28

सुआ, ददरिया, पंथी, करमा। गाँवय-नाँचय सब घर-घर मा।।-29
सैला, सरहुल अउ डंडारी। इँखर हवय अलगे चिन्हारी।।-30

गोंड़, कोरकू, हल्बा, सौंरा। तोर चरण इँखरो घर, चौंरा।।-31
कोल, कँवर, धनवार, अगरिया। रहँय-बसँय इन सब मनफरिया।।-32

कोठा, कोठी, कोठार-बियारा। सरी कुसाली तोर सहारा।।-33
घर, अँगना अउ बखरी-बारी। तोर कृपा ले महल, अटारी।।-34

टिन, बाक्साइट, डोलोमाइट। हीरा, सोना अउ ग्रेफाइट।।-35
छुही, कोयला, चूना, पखरा। छपछप ले छतीसगढ़  अँचरा।।-36

मोर कलम थक जाथे दाई। लिखत-लिखत मा तोर बड़ाई।।-37
जिनगी भर देबे आसीसा। लिखे हवँव तोरे चालीसा।।-38

अमित सरग नइ चाही चोखा। इहें जनम के माढ़य जोखा।।-39
करबे सुख-दुख सरी सरेखामोर भाग मा लिख ये लेखा।।-40

दोहा:-
माटी चंदन हे इहाँ, माथा तिलक लगाँव।
विनती अतके हे अमित, जनम इहें मैं पाँव।।

कन्हैया साहू 'अमित'✍️ भाटापारा छत्तीसगढ़
गोठबात 9200252055
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रविवार, 8 मई 2022

आल्हा चालीसा

आल्हा चालीसा (आल्हा छंद)

(कन्हैया साहू 'अमित')


सुमरनि:-(दोहा)
1~हाँथ जोड़ बिनती करँव, काटव अमित कलेस।
  जय गनपति जय गजबदन, गिरिजापूत गनेस।
   
2~ गिरिजापूत गनेस जी, राख सभा मा लाज।
सबद बता माँ सारदा, बानी बइठ बिराज।

3~बानी बइठ बिराज लव, कूलदेव भगवान।
चलत रहय ये लेखनी, दव अइसन बरदान।

4~दव अइसन बरदान गुरु, सिखँव लिखँव सब छंद।
गुरु किरपा बड़ भाग ले, मिलय अमित आनन्द~5

सुमरनि:- (चौपाई)
1~सुमिरँव सदा ददा दाई ला,
     अउ मोर माँवली माई ला।
     सुमिरँव अरुण निगम श्री गुरुवर,
     छंद ग्यान जे देइन सुग्घर।

2~परमपिता प्रभु पालनहारी,
  जय हो ब्रम्हा बिस्नु तिपुरारी।
   भूल चूक माँफी निपटारा,
    किरपा करहू 'अमित' अपारा।

3~अँड़हा अदरा अमित अजारा,
     रहिथँव मैं हा भाटापारा,
     प्रभु चरनन मैं टेकँव माथा,
     गुरु किरपा ये आल्हा गाथा।

*कथा प्रसंग*

हे गनेस तैं सबद बरन दे, सदा सहायक सारद माय।
हाँथ धरे हँव तुँहर लेखनी, अक्छर-अक्छर 'अमित' लिखाय।।~1

जोंड़ जाँड़ के आखर-आखर, लिखय 'अमित' अँड़हा मतिमंद।
गुरु किरपा के बरसे बरसा, तभे लिखत हँव आल्हा छंद।।~2

अब्बड़ अद्भुत अलखा आल्हा, अलहन अलकर टार मिटाय।
अटकर अजरा अलवा-जलवा, अड़हा जइसे अमित बताय।।~3

महाबीर बन जनमें आल्हा, बाहुबली ये 'अमित' कहाय।
जोश जवानी जउँहर जिनगी, सुन के कायर झट मर जाय।।~4

आल्हा ऊदल दू झन भाई, रहँय महोबा बीर महान।
गाँव-गाँव मा गाथैं गाथा, आल्हा ऊदल जस गुनगान।।~5

धरमराज अवतारी आल्हा, भीम सहीं ऊदल दमदार।
लड़ें लडा़ई बावन ठन जी, जिनगी भर नइ जानिन हार।।~6

कौरव पांड़व कुल हा जूझे, लड़गे कुरूक्षेत्र मैदान।
जनम धरें कलजुग मा दूनों, आल्हा ऊदल होंय महान।।~7

जस गुन गावँव इन जोद्धा के, हमरे बस के नइहे बात।
जेखर कीरति घर-घर बगरे, जस गाथा गावँय दिन रात।~8

******* *आल्हा के जनम* ********

जेठ महीना दसमी जनमे, आल्हा देवल पूत कहाय।
बन जसराज ददा गा सेउक, गढ़ चँदेल के हुकुम बजाय।।~9

ददा लड़त जब सरग सिधारे, आल्हा होगे एक अनाथ।
दाई  देवल परे 
अकेल्ला, राजा रानी  देवँय  साथ।।~10

तीन महीना पाछू जनमे, बाप जुद्ध में जान गवाँय।
बीर बड़े छुट भाई आल्हा, ऊधम ऊदल नाँव धराय।।~11

राजा परमल पोसय पालय, रानी मलिना राखय संग।
राजमहल मा खेंलँय खावँय, आल्हा ऊदल रहँय मतंग।।~12

सिक्छा-दीक्छा होवय सँघरा, लालन-पालन पूत समान।
बड़े बहादुर बलखर बनगे, लागँय राजा के संतान।।~13

बड़े लड़इया आल्हा ऊदल, जेंखर बल के पार न पाय।
रक्छक बन परमाल देव के, आल्हा ऊदल जान लड़ाय।।~14

आल्हा संगी सिधवा मितवा, नइहे चोला एको दाग।
थरथर कापँय कपटी खोड़िल, बैरी बर बड़ बिखहर नाग।।~15

बन चँदेल राजा के सेउक, अपन हँथेरी राखँय प्रान।
नित चँदेल हो चौगुन चाकर, दुनिया भर मा बाढ़य शान।।~16

'अमित' महोबा के बलवंता, आल्हा आगू कोन सजोर।
बाढ़त नदियाँ पूरा पानी, पुन्नी कस चन्दा अंजोर।।~17

झगरा माते बात-बात मा, मार काट अउ हाहाकार।
पोठ लहू के होरी होवय, पवन सहीं खड़कय तलवार।।~18

काँही तो नइ भावय इनला, रास रंग अउ तीज तिहार।
फड़फड़ फरकय भक्कम भुजबल, रहँय जुद्ध बर बीर तियार।।~19

सुते नींद नइ आवय दसना, बड़ बज्जर बलखर बलबीर।
लड़त-लड़त बीतय दिन रतिहा, दँय झट बैरी छाती चीर।।~20

राजपाट राजा रज रक्छक, आल्हा नइ तो चिटिक अबेर।
कुकुर कोलिहा सौ का करहीं, आल्हा ऊदल बब्बर शेर।।~21

सतरा बछर उमर मा होवय, आल्हा के शुभ लगन बिहाव।
नैनागढ़  नेपाली  राजा,  बेटी  मछला  संग  हियाव।।~22

राजकुमारी मछला जानय, जादू के जब्बर जर ग्यान।
नाँव सोनवा मछला जानव, रहय एक नइ इँखर समान।।~23

बीर बहादुर बघवा बेटा, मछला आल्हा के संतान।
बाप कका कस बड़ बलवंता, इंदल बरवाना बलवान।।~24

******* *आल्हा के पराक्रम* ******

राग रागिनी नइ तो भावय, राजमहल अब नइच सुहाय।
बोल बचन सुन महतारी के, बेटा बाघ मार घर लाय।।~25

आज बाघ कल बैरी मारव, तब छतिया के दाह बुताय।
बिन अहेर के मैं नइ मानँव, दाई ताना इही सुनाय।।~26

जेखर बेटा कायर निकले, महतारी रो-रो पछताय।
सुनव दुनों तुम आल्हा ऊदल, असल पूत जे बचन निभाय।।~27

कुकुर बछर बारा बस जीयय, जीयय सोला साल सियार।
बरिस अठारा छत्री जीये, आगू के जिनगी बेकार।।~28

मूँड़ टँगागे बाप कका के, माँडूगढ़ बर रुख के डार।
अधरतिया के अध बेरा मा, मूँड़ी बड़ पारय गोहार।।~29

आवव आल्हा ऊदल आवव, मोर लड़ंका लठिया लाल।
बँच के आहू माँडूगढ़ मा, बन बघेल के जी के काल।।~30

खूब लड़इया लहुआ आल्हा, दूसर ले देवी बरदान।
भगत भवानी सारद माँ के, जइसे सीया के हनुमान।।~31

बइठ बछर बारा बन तपसी, मैहर माई के दरबार।
मूँड़ काट अरपन देवी ला, होय अमर आल्हा अवतार।।~32

आल्हा ऊदल चलथें अइसे, जइसे रामलखन चलि जाय।
भुजबल भारी भक्कम भइगे, आँखी भभका कस भमकाय।।~33

आल्हा ऊदल सिरतों सेउक, समझँय येला अपन सुभाग।
धरम करम हे राजपूत के, लड़त-लड़त दँय प्रान तियाग।।~34

धरम धजा कस उड़े पताका, नाँव धराये हे अलहान।
सूरुज बूड़य बुड़ती बेरा, नइ बूड़ै आल्हा के शान।।~35

जीत-जीत के जिनगी जीयँय, जउँहर जोद्धा जय जयकार।
जेखर बैरी जीयँत जागय, ओखर जिनगी हा बेकार।।~36

रन मा आल्हा करँय सवारी, पुष्यावत हाथी के नाँव।
खदबिद-खदबिद घोडा़ दउँड़े, कहाँ थोरको माढ़य पाँव।।~37

देशराज बर खाये किरिया, आल्हा जोरय जम्मों जात।
एकमई सब राहव काहय, भेदभाव के छोड़व बात।।~38

सबके हितवा आल्हा ऊदल, परहित मा ये भरँय हुँकार।
रक्छक बहिनी महतारी के, बैरी के दँय सरी उजार।।~39

आल्हा ऊदल बड़ बलिदानी, राज महोबा के बिसवास।
करनी अइसन करें तियागी, अमर नाँव लिखगें इतिहास।~40
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*कन्हैया साहू "अमित"*
शिक्षक ~भाटापारा (छ.ग)
संपर्क ~ 9200252055
©सृजन~ 21/05/2018®
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गुरुवार, 28 अप्रैल 2022

नवा जमाना - सार छंद

सार छंद - नवा जमाना

शिक्षा दीक्षा कहाँ गवाँगे, आगे नवा जमाना।
पाँव परय अब माड़ी के सब, छोड़य माथ नवाना।-1

हाथ जोड़ के मुँड़ी नवाई, कोन कोत नंदागे।
सेखी झारै देखमरी मा, हाय हलो ह हमागे।-2

सास बहू के सुमता जरगे, कहाँ पटै अब तारी।
पिता पूत के पैंती उसले, लइका देवय गारी।-3

लाज सरम हा मरगे अब तो, पहिरँय अलकर कपड़ा।
गिधवा मनखे देख निहारँय, दिन दिन बाढ़य लफड़ा।-4

फेसन कइसन हे अलकरहा, पाँच हाथ के लुगरा।
मुँहू कान ला तोपे ढ़ाँके, पीठ पेट हे उघरा।-5

चिरहा फटहा जींस कपाये, भुँइया तक ये लामे।
कनिहा खाल्हे कँसे बेल्ट हे, पता नहीं का थामे।।-6

चुंदी रंगे रिंगीचिंगी, अलकरहा कटवाथें।
टूरी-टूरा एक्के दिखथें, कोन कहाँ चिन्हाँथें।।-7

अपन हाथ मा हावय सिरतों, अपने सब मरजादा।
नवा जमाना संग चलव पर, राहव सुग्घर सादा।-8
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कन्हैया साहू 'अमित'- शिक्षक, भाटापारा छत्तीसगढ़

शनिवार, 26 मार्च 2022

हमर भाखा- कुण्डलिया

अमित के कुण्डलिया - हमर भाखा

सुखदाई भाखा हमर, राखव एखर मान।
अपने बोली मा बसय, सिरतों हमर परान।।
सिरतों हमर परान, भले झन पतियावव।
बाढ़ै मया दुलार, अपन भाखा बतियावव।।
कहय अमित कविराज, भाख अब निज बगराई।
उलहोवय दिन रात, अपन भाखा सुखदाई।।

बड़ही बहुते जी बने, छत्तीसगढ़ी राज।
होही भाखा मा हमर, जब्भे जम्मों काज।।
जब्भे जम्मों काज, गोठ मा
होहय जब्बर।
रद्दा खुलही नेक, बढ़े के सुग्घर सब बर।।
पढ़व लिखव निज भाख, रहव झन, अँड़हा अँड़ही।
हमर राज हा पोठ, जबर के आगू बड़ही।।

महतारी भाखा अपन, होथे ब्रम्ह समान।
छोड़ बिदेशी मोह ला, करलव निज सम्मान।।
करलव निज सम्मान, मया के भरही झोली।
अंतस राखव बोध, अपन के बोलव बोली।।
गुनव अमित के गोठ, सबो के पटही तारी।
छोंड़ छाँड़ सब लाज, बोल भाखा महतारी।।

सृजन- कन्हैया साहू 'अमित'
शिक्षक- भाटापारा छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

हमर देश के सेना~आल्हा छंद

हमर देश के सेना (आल्हा छंद)

हमर देश के सेना देखव, भारी बलकर बल के खान।
सीमा के रक्छा खातिर इन, धरे हाथ मा अपने प्रान।।

बैरी तुम झन सिधवा समझव, हमर सेनानी यम के काल।
जीभ सुरर के घेंच पूजथें, भरथें भूँसा निछथें खाल।।

घाम-जाड़ अउ बरसत पानी, सीमा के इन करँय सरेख।
थरथर काँपय दुश्मन लिज्झड़, तरफर तारारोसी देख।।

खरतरिहा खरखर बड़ खर्रा, येमन बैरी बर खखुवाँय।
फरफर फरकय भुजबल बहुते, देखत मा दुश्मन भकवाँय।।

भारत माता के जय बोलँय, सँघरा जइसे शेर दहाड़।
सुनके दुश्मन पल्ला भागँय, देही नइ तो भुजा उखाड़।।

खाँध जोर जब सेना चलथे, लागय जइसे हवा-गरेर।
सउँहत दिखथे काल बरोबर, लगथें कोनो भँवर मछेर।।

बरसय जब इन बैरी उप्पर, धरके गोला अउ बंदूक।
पानी के बूड़े नइ बाचँय, देथें झट जर सुद्धा फूँक।।

ठाँव-ठाँव मा बाधा बइठे, जंगल-झाड़ी, नदी-पहाड़।
डहर कठिन नइ काँही जानय, कोनो नइ कर सकँय बिगाड़।।

सरदी-गरमी, बरसत बादर, रक्षा मा इन राहँय ठाढ़।
देख-देख के धजा तिरंगा, लहू-पछीना होवँय गाढ़।।

भारत भुँइया प्रान अधारा, सबले बड़के मानँय देस।
गलत करइया मनखे ला इन, भरभर भुर्री कस दँय लेस।।

कायर-कपटी, खोड़िलमन ला, भेजँय इन यमलोक सकेल।
जौनै देखँत नजर गड़ा के, ओखर आँखी बाँटी खेल।।

भारत के इन बघवा बेटा, धरथे गजबे मन मा धीर।
बरजे ले नइ मानय बैरी, तब देवँय धर ठाढ़े चीर।।

हितवा खातिर हितवा-सिधवा, बैरी बर हें डोमी साँप।
महाकाल कस काल बरोबर, देखय बैरी पोटा काँप।।

भारत के सैनिकमन सिरतों, हावँय जब्बर वीर सपूत।
महतारी के सेवा खातिर, जान लड़ावँय 'अमित' अकूत।।

कन्हैया साहू 'अमित'~ भाटापारा छत्तीसगढ़ ©®
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चंद्रयान अभिमान

चंद्रयान  ले  नवा  बिहान,  हमर तिरंगा, बाढ़य शान। रोवर चलही दिन अउ रात, बने-बने बनही  हर  बात, दुनिया होगे अचरिज आज, भारत मुँड़़ अब सजगे ताज, ...