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गुरुवार, 26 नवंबर 2020

बाल कविता ~ बेटी

बेटी
जग मा गजब दुलौरिन बेटी।
बड़ सजोर कमईलिन बेटी।।

दया धरम चिन्हारी बेटी।
पुरखा के रखवारी बेटी।।

बिगड़े भाग  बनाथे बेटी।
दू कुल मान बढ़ाथे बेटी।।

नइ हे अब तो अबला बेटी।
बाना बोहय सबला बेटी।।

सदा 'अमित' सुखदाई बेटी।
करथे काज भलाई बेटी।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ फुग्गावाला

फुग्गावाला

फुग्गावाला हा आये हे।
लइकामन सब सकलाये हे।।

रिंगी-चिंगी फुग्गा फूले।
तीर तार मा जम्मों बूले।।

दू रुपिया मा दूठन आवय।
लुहुर-लुहुर सब लेके जावय।।

छिंटही पिंवरी सादा लाली।
नाचत कूदत पीटँय ताली।।

हब हब फुग्गा सबो सिरागे।
लइकामन के चुहल थिरागे।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ बरखा

बरखा~बाल कविता

जब जब सावन भादो आथे।
करिया-करिया  बादर  छाथे।।

कड़कड़ कड़कड़ बिजली चमके।
बरसय  बादर  जउँहर  जमके।।

चूहय बहुते छानी परवा।
छू लम्बा तब माढ़े नरवा।।

सुरुर सुरुर चलथे पुरवाही।
गिरथे  पानी  हाहीमाही।।

संंग नँगरिहा नाँगर बइला।
खोर गली मा मातय चिखला।।

नरवा नँदिया डबरी तरिया।
हरसाथे सब भाँठा परिया।।

नाचय जब-जब बरखा रानी।
चारों  मूँड़ा  पानी-पानी।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~15/09/2020
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बाल कविता ~02

बरखा~बाल कविता

जब जब सावन भादो आथे।
करिया-करिया  बादर  छाथे।।

कड़कड़ कड़कड़ बिजली चमके।
बरसय  बादर  जउँहर  जमके।।

चूहय बहुते छानी परवा।
छू लम्बा तब माढ़े नरवा।।

सुरुर सुरुर चलथे पुरवाही।
गिरथे  पानी  हाहीमाही।।

संंग नँगरिहा नाँगर बइला।
खोर गली मा मातय चिखला।।

नरवा नँदिया डबरी तरिया।
हरसाथे सब भाँठा परिया।।

नाचय जब-जब बरखा रानी।
चारों  मूँड़ा  पानी-पानी।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~15/09/2020
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बुधवार, 25 नवंबर 2020

बाल कविता~मिट़ठू

मिट्ठू

चोंच लाल अउ हरियर पाँखी।
जुगुर-जुगुर बस दिखथे आँखी।।

चुरपुर  मिरचा  बहुते खाथे।
चटर-चटर चटरू बन जाथे।।

उँच  अगास  ये फुर्र उड़ाये।
अपन  अजादी येला भाये।।

खावय आमा जाम जोंधरा।
पीपर  खोर्ड़ा  टीप खोंधरा।।

लालच मा दाना चुग जाथे।
तभे  पिंजरा  बीच धँधाथे।।

रचना~कन्हैया साहू 'अमित'
सृजन दिनाँक~26/11/2020

चंद्रयान अभिमान

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