यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

बाल कविता ~ किताब

किताब
हे किताब असल संगवारी।
देथे सिरतों सबो जानकारी।।

पढ़ले एला मनभर आगर।
भरे ज्ञान के टिपटिप सागर।।

दुनिया भरके बात बताथे।
मन के सरी भरम मेटाथे।।

हर सवाल के उत्तर मिलथे।
पढके अंतस सुग्घर खिलथे।।

संगी एला जौन बनाथे।
पढ़े लिखे मा अव्वल आथे।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ मच्छर

मच्छर
रतिहा बेर कलेचुप आथे।
कान तीर मा गुनगुन गाथे।।

कोन सुते हे कोन ह जागत।
भिथिया बइठे रहिथे ताकत।।

आरो जब थोरिक नइ पावय।
आके तुरते सुजी लगावय।।

छिन-छिन बस खटिया के चक्कर।
मलेरिया के इही ह मच्छर।।

राखव घर मा साफ सफाई।
मच्छर के तब होय बिदाई।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

गुरुवार, 26 नवंबर 2020

बाल कविता ~ बिहनिया

बिहनिया
होत बिहनिया कुकरा बासय।
बड़े फजर  ले जम्मों जागय।।

खोर गली मा छिटका गोबर।
साफ  सफाई  सरग बरोबर।।

चींव चाँव चिरई नरियावव।
छानी ले धुँगिया उड़ियावय।।

चउँक पुराये सुघर मुँहाटी।
जावँय लउहे  गोदी  माटी।।

लाली सूरुज सबके हिस्सा।
इही गाँव गँवई के किस्सा।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ बेटी

बेटी
जग मा गजब दुलौरिन बेटी।
बड़ सजोर कमईलिन बेटी।।

दया धरम चिन्हारी बेटी।
पुरखा के रखवारी बेटी।।

बिगड़े भाग  बनाथे बेटी।
दू कुल मान बढ़ाथे बेटी।।

नइ हे अब तो अबला बेटी।
बाना बोहय सबला बेटी।।

सदा 'अमित' सुखदाई बेटी।
करथे काज भलाई बेटी।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ फुग्गावाला

फुग्गावाला

फुग्गावाला हा आये हे।
लइकामन सब सकलाये हे।।

रिंगी-चिंगी फुग्गा फूले।
तीर तार मा जम्मों बूले।।

दू रुपिया मा दूठन आवय।
लुहुर-लुहुर सब लेके जावय।।

छिंटही पिंवरी सादा लाली।
नाचत कूदत पीटँय ताली।।

हब हब फुग्गा सबो सिरागे।
लइकामन के चुहल थिरागे।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

चंद्रयान अभिमान

चंद्रयान  ले  नवा  बिहान,  हमर तिरंगा, बाढ़य शान। रोवर चलही दिन अउ रात, बने-बने बनही  हर  बात, दुनिया होगे अचरिज आज, भारत मुँड़़ अब सजगे ताज, ...