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शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

बाल कविता ~ केरा

चिरई
चींव-चींव बड़ करथे चिरई।
उँच अगास फुर्र-फुर्र फिरई।।

मुँह मा भरके लावय चारा।
पिलवा बीच करय बँटवारा।।

इँखर खोंधरा रैन बसेरा।
झेलय पानी हवा गरेरा।।

फुदुक-फुदुक फुतका मा फुदकय।
देख कोंड़हा कनकी कुलकय।।

अँगना मा जब-जब ये आवय।
सबके मन ला नँगते भावय।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ पतंग

पतंग
फरफर-फरफर  उड़य  पतंग।
किसिम-किसिम के कतको रंग।।
चिरई चिरगुन कस ऊँच अगास।
देखइया  मन  मस्त  मतंग।।

मंजा  डोरी  ले पहिचान।
ढ़ील छोड़ दे, झन दे तान।।
जावय  बादर  ले ओ पार।
तभे जीत होही ये जान।।

ये पतंग कुछु सीख सिखाय।
बंधन ले  जिनगी मुसकाय।।
जेखर  बँधना  जावय  टूट।
फेर कभू ना  वो टिक पाय।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ किताब

किताब
हे किताब असल संगवारी।
देथे सिरतों सबो जानकारी।।

पढ़ले एला मनभर आगर।
भरे ज्ञान के टिपटिप सागर।।

दुनिया भरके बात बताथे।
मन के सरी भरम मेटाथे।।

हर सवाल के उत्तर मिलथे।
पढके अंतस सुग्घर खिलथे।।

संगी एला जौन बनाथे।
पढ़े लिखे मा अव्वल आथे।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

बाल कविता ~ मच्छर

मच्छर
रतिहा बेर कलेचुप आथे।
कान तीर मा गुनगुन गाथे।।

कोन सुते हे कोन ह जागत।
भिथिया बइठे रहिथे ताकत।।

आरो जब थोरिक नइ पावय।
आके तुरते सुजी लगावय।।

छिन-छिन बस खटिया के चक्कर।
मलेरिया के इही ह मच्छर।।

राखव घर मा साफ सफाई।
मच्छर के तब होय बिदाई।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

गुरुवार, 26 नवंबर 2020

बाल कविता ~ बिहनिया

बिहनिया
होत बिहनिया कुकरा बासय।
बड़े फजर  ले जम्मों जागय।।

खोर गली मा छिटका गोबर।
साफ  सफाई  सरग बरोबर।।

चींव चाँव चिरई नरियावव।
छानी ले धुँगिया उड़ियावय।।

चउँक पुराये सुघर मुँहाटी।
जावँय लउहे  गोदी  माटी।।

लाली सूरुज सबके हिस्सा।
इही गाँव गँवई के किस्सा।।
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कन्हैया साहू 'अमित'~भाटापारा छत्तीसगढ़

चंद्रयान अभिमान

चंद्रयान  ले  नवा  बिहान,  हमर तिरंगा, बाढ़य शान। रोवर चलही दिन अउ रात, बने-बने बनही  हर  बात, दुनिया होगे अचरिज आज, भारत मुँड़़ अब सजगे ताज, ...