यह ब्लॉग खोजें
मंगलवार, 16 मई 2023
बालगीत - आवव खाबो गुपचुप
रविवार, 30 अप्रैल 2023
बालगीत - नानी के घर जाबो
गुरुवार, 28 अप्रैल 2022
नवा जमाना - सार छंद
सार छंद - नवा जमाना
शिक्षा दीक्षा कहाँ गवाँगे, आगे नवा जमाना।
पाँव परय अब माड़ी के सब, छोड़य माथ नवाना।-1
हाथ जोड़ के मुँड़ी नवाई, कोन कोत नंदागे।
सेखी झारै देखमरी मा, हाय हलो ह हमागे।-2
सास बहू के सुमता जरगे, कहाँ पटै अब तारी।
पिता पूत के पैंती उसले, लइका देवय गारी।-3
लाज सरम हा मरगे अब तो, पहिरँय अलकर कपड़ा।
गिधवा मनखे देख निहारँय, दिन दिन बाढ़य लफड़ा।-4
फेसन कइसन हे अलकरहा, पाँच हाथ के लुगरा।
मुँहू कान ला तोपे ढ़ाँके, पीठ पेट हे उघरा।-5
चिरहा फटहा जींस कपाये, भुँइया तक ये लामे।
कनिहा खाल्हे कँसे बेल्ट हे, पता नहीं का थामे।।-6
चुंदी रंगे रिंगीचिंगी, अलकरहा कटवाथें।
टूरी-टूरा एक्के दिखथें, कोन कहाँ चिन्हाँथें।।-7
अपन हाथ मा हावय सिरतों, अपने सब मरजादा।
नवा जमाना संग चलव पर, राहव सुग्घर सादा।-8
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
कन्हैया साहू 'अमित'- शिक्षक, भाटापारा छत्तीसगढ़
रविवार, 22 अगस्त 2021
सार छंद मा गीत
*सार छंद गीत ~ मोर मयारू भैया*
जुग-जुग जीबे जग मा तैंहा, मोर मयारू भैया।
हवच तहीं हा ये दुनिया मा, सिरतों मोर पुछैया।।
तोर बिना घर सुन्ना लागै, अंतस छाय हदासी।
भाँय-भाँय बड़ गाँव-गली हा, आवय बस रोवासी।।
भेजत हावँव राखी तोला, हमरे देश रखैया।
जुग-जुग जीबे जग मा तैंहा, मोर मयारू भैया।....
सावन पुन्नी राखी आथे, ढरथे आँसू आँखी।
मन करथे उड़ जाँव तोर तिर, लगा देंह मा पाँखी।।
सुरता आथे बीते दिन हा, छिन-छिन संग लड़ैया।
जुग-जुग जीबे जग मा तैंहा, मोर मयारू भैया।....
बाढ़ै जश बड़ तोर रात दिन,, गड़य न पाँव म काँटा।
दुख-पीरा चिटको झन आवै, चाबय कभू न चाँटा।
मोर उमर लग जावय तोला, सब बर मया मरैया।
जुग-जुग जीबे जग मा तैंहा, मोर मयारू भैया।....
हवच तहीं हा ये दुनिया मा, सिरतों मोर पुछैया।।
*कन्हैया साहू 'अमित'*✍
भाटापारा छत्तीसगढ़ ©®
चंद्रयान अभिमान
चंद्रयान ले नवा बिहान, हमर तिरंगा, बाढ़य शान। रोवर चलही दिन अउ रात, बने-बने बनही हर बात, दुनिया होगे अचरिज आज, भारत मुँड़़ अब सजगे ताज, ...
-
आन अब, शान सब, हमर अभिमान हें। छंद के, बंध के, ग्यानी महान हें।। संग दय, रंग दय, हाथ ला थाम के। देव सम, हृदय नम, 'अरुण' गुरु ...
-
1001- लाली डब्बा हावै साँच। भीतर बहुते पींयर खाँच।। खाँचा मा बड़ मोती दाँत। खावँय जम्मों मजा उड़ाँत।। -अनार 1002- आजे भर उपयोगी जान। काली ब...
-
गुरु घासीदास बाबा पायलगी तोला बबा, हे गुरु घासीदास। मन अँधियारी मेट के, अंतस भरव उजास।। सतगुरु घासीदास हा, मानिन सत ला सार। बेवहार सत आच...