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मंगलवार, 16 मई 2023

बालगीत - आवव खाबो गुपचुप

बालगीत - आवव खाबो गुपचुप

अल्लू-बल्लू, अमलू-रमलू, आवव खाबो गुपचुप।
सरदी-खाँसी के डर नइ हे, बइठव झन तुम चुपचुप।।

देख सँझौती बेरा सुग्घर, घर ले बाहिर निकलव।
अमसुर-गुरतुर सेवाद भरे, थोर-थोर सब चिखलव।।
अमली पानी मिला-मिला के, मुँह मा डारव गुपगुप।
अल्लू-बल्लू, अमलू-रमलू, आवव खाबो गुपचुप।।-1

कोनो खावव चाट बना के,  मटर, मसाला डारे।
तुरतेताही तात-तात बड़, झन पुछ येखर बारे।।
मन होथे बस खाते जावँव, सरपट सँइया टुपटुप।।
अल्लू-बल्लू, अमलू-रमलू, आवव खाबो गुपचुप।।-2

भेल, पापड़ी, आलू टिकिया, गजब मिठाथे नड्डा।
आनी-बानी खाये खातिर, चलव चलिन चौगड्डा।।
हाथ लमा के जम्मों खाथें, कहन न कोनो छुप छुप।।
अल्लू-बल्लू, अमलू-रमलू, आवव खाबो गुपचुप।।-3 

सरदी-खाँसी के डर नइ हे, बइठव झन तुम चुपचुप।
अल्लू-बल्लू, अमलू-रमलू, आवव खाबो गुपचुप।।....

सृजन- कन्हैया साहू 'अमित'✍️
शिक्षक- भाटापारा छत्तीसगढ़ ©®

रविवार, 30 अप्रैल 2023

बालगीत - नानी के घर जाबो

बालगीत - नानी के घर जाबो

छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो।
पढ़ना-लिखना छोड़ अभी हम, नँगते मजा उड़ाबो।।

पोठ करे हन पढ़ई-लिखई, हालत होगे खस्ता।
निपट परीक्षा गेहे जम्मों, थीरथार हे बस्ता।
बेर चढ़त ले नींद भाँजबो, सपना सुघर सजाबो।
छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो।-1

खीर तसमई संग करौनी, मिलही दूध, महेरी।
गाय, भँइस के पाछू फिरबो, पाबो बछिया, छेरी।
मलर-मलर मनमाने करबो, इँतरौना इँतराबो।
छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो।-2

बारी-बरछा बइठ बिलमबो, थाँघा झूलना डारे।
आनी-बानी फर हम खाबो, भले पेट ला झारे।
नरवा-नदियाँ, तरिया-डबरी, मनभर डुबक नहाबो।
छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो।-3

ममा पुरोही खँगती-बढ़ती, मामी मया जताही।
गोठ सुजानिक नाना करके, बढ़िया बात बताही।
संग समो के सब ला संगी, सिरतों समझ बढ़ाबो।
छुट्टी होगे गरमी के अब, नानी के घर जाबो।-4
पढ़ना-लिखना छोड़ अभी हम, नँगते मजा उड़ाबो।।

सृजन- कन्हैया साहू 'अमित'
शिक्षक- भाटापारा छत्तीसगढ़
गोठबात - 9200252055
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शनिवार, 29 अप्रैल 2023

बाल गीत - पटपट पटपट पिटिर पटिर

बाल गीत

पटपट पटपट पिटिर पिटिर,
सिटसिट सिटसिट सिटिर सिटिर।

उमड़ै घुमड़ै बादर करिया,
बरसै बरखा भाँठा, परिया।
लइका भागँय गदबिद-बदबिद,
बूँद गिरै जब रदरिद-रदरिद।
कीच कीच बड़ किचिर-किचिर,
पटपट पटपट पिटिर पिटिर।

टपटप चूहय छानी-परवा,
नवा जवानी नदियाँ-नरवा।
चींव चाँव चट चिरई चुरगुन,
रतिहा झींगुर रुनझुन रुनझुन।
लुहुर-लुहुर अउ लिबिर-लिबिर,
पटपट पटपट पिटिर पिटिर।

हवा  गरेरा  सरसर-सरसर।
पान पतोरा फरफर-फरफर।
बिजली चमकै झमझम-झमझम,
बादर  बाजय  दमदम-दमदम।
झरय झड़ी झक झिमिर झिमिर,
पटपट पटपट पिटिर पिटिर।

सृजन- कन्हैया साहू 'अमित'©®
शिक्षक- भाटापारा छत्तीसगढ़
गोठबात - 9200252055

सोमवार, 14 नवंबर 2022

छतीसगढ़ चालीसा ~ कन्हैया साहू 'अमित'

छत्तीसगढ़ चालीसा

दोहा:-
दाई के अँचरा भरे, ममता मया खदान
जय छतीसगढ़ नित कहत, करय अमित गुणगान।।

चौपाई:-
जय जय छतीसगढ़ महतारी। महिमा तोरे हावय भारी।।-1
एक नवंबर दिन हे पावन। रंग-रूप हे तोर सुहावन।।-2

एक हाथ मा हँसिया, बाली। दुसर हाथ बाँटत खुशहाली।।-3
सरी अंग मा गहना साजे। दुनिया भर मा डंका बाजे।।-4

कोरवान हे लुगरा हरियर। माथ मउर मन मोहय सुग्घर।।-5
तोरे मुखड़ा मन ला भावय। तोर सहीं कोनो नइ हावय।।-6

करनफूल अउ ककनी, करधन। सूँता, रुपिया पहिरे बनठन।।-7
चुटकी, पैरी, बिछिया, लच्छा। माहुर, टिकली बहुते अच्छा।।-8

ओली तोरे अन, ओन्हारी।  भरपुरहा भाजी तरकारी।।-9
खानपान के भरे भंडारा। चटनी-बासी अगम अपारा।।-10

गुरहाचीला,भजिया, हलुआ।
अरसा, पपची, पिड़िया, पकुआ।।-11
लाड़ू, सोंहारी, अंगाकर। रोटी-पीठा इँहचे मनभर।।-12

रिता कभू नइ राहय कोरा। सिरतों सिगसिग धान कटोरा।।-13
गुरमटिया, सफरी सुखसागर। पलटू, लुचई, रानीकाजर।।-14

हाही-माही धनहा, परिया। कुआँ-बावली, नँदिया, तरिया।।-15
माटी बड़ कन्हार, मटासी। खेती कारज, भरय हुलासी।।-16

इंद्रावती, ईब, मनियारी। महानदी, अरपा के धारी।।-17
लीलागर, शिवनाथ, जमुनिया। लहर-लहर लहराय दुगुनिया।।-18

गंगरेल जस लागय गंगा। हसदो, खुड़िया लहर तुरंगा।।-19
पुटका, बंकी अउ किंकारी। कोड़ार, मोंगरा मुखतारी।।-20

ईसर राजा, ठाकुर देवा। ठउर-ठउर महमाया सेवा।।-21
जयति शीतला, जय बगदाई। मेड़ोपार चुरैलिन माई।।-22

सिरपुर, राजिम अउ डोंगरगढ़। भोरमदेव, रतनपुर बढ़-चढ़।।-23
दंतेवाड़ा, शिवरीनारायण। धर्म धाम हे छाहित कण-कण।।-24

जय गिरौध, जय दामाखेड़ा। चारोंकोती सत के बेड़ा।।-25
खैर, चार, तेंदू अउ मँउहा। जिनिस इहाँ सब झँउहा-झँउहा।।-26

तिज तिहार हे कोरी-कोरी। राखी, देवारी अउ होरी।।-27
इहाँ हरेली, जोत जवाँरा। पोरा-तीजा प्राण अधारा।।-28

सुआ, ददरिया, पंथी, करमा। गाँवय-नाँचय सब घर-घर मा।।-29
सैला, सरहुल अउ डंडारी। इँखर हवय अलगे चिन्हारी।।-30

गोंड़, कोरकू, हल्बा, सौंरा। तोर चरण इँखरो घर, चौंरा।।-31
कोल, कँवर, धनवार, अगरिया। रहँय-बसँय इन सब मनफरिया।।-32

कोठा, कोठी, कोठार-बियारा। सरी कुसाली तोर सहारा।।-33
घर, अँगना अउ बखरी-बारी। तोर कृपा ले महल, अटारी।।-34

टिन, बाक्साइट, डोलोमाइट। हीरा, सोना अउ ग्रेफाइट।।-35
छुही, कोयला, चूना, पखरा। छपछप ले छतीसगढ़  अँचरा।।-36

मोर कलम थक जाथे दाई। लिखत-लिखत मा तोर बड़ाई।।-37
जिनगी भर देबे आसीसा। लिखे हवँव तोरे चालीसा।।-38

अमित सरग नइ चाही चोखा। इहें जनम के माढ़य जोखा।।-39
करबे सुख-दुख सरी सरेखामोर भाग मा लिख ये लेखा।।-40

दोहा:-
माटी चंदन हे इहाँ, माथा तिलक लगाँव।
विनती अतके हे अमित, जनम इहें मैं पाँव।।

कन्हैया साहू 'अमित'✍️ भाटापारा छत्तीसगढ़
गोठबात 9200252055
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चंद्रयान अभिमान

चंद्रयान  ले  नवा  बिहान,  हमर तिरंगा, बाढ़य शान। रोवर चलही दिन अउ रात, बने-बने बनही  हर  बात, दुनिया होगे अचरिज आज, भारत मुँड़़ अब सजगे ताज, ...